ऐसा क्यों होता हैं ?
सवाई माधोपुर की पूनम
वर्मा वो लम्हा कभी नहीं भूल सकती जब शादी के बाद अपने ससुराल इतवा के खातोली
पहुची और तथा कथित ऊची जात वालों के कुएं से पानी का मटका भरने के कारण पूनम वर्मा
का मटका फोड़ दिया गया ! उन्हें पहली बार लगा जिस देश के संविधान में सभी को एक
सामान अधिकार प्राप्त है वहीं एक तरफ तरल पानी को भी ऊच-नीच की दीवार से बांटा जा
रहा है ! वे कहती है कि भारत में दलित उसमें भी महिला होने के मायने क्या हैं ! दलित
जाति के लोगों की मानें तो सामाजिक भेदभाव तो दलित का शमशान तक पीछा करते हैं ! आज
अन्य जातियों की महिलाओं में एक आत्मविश्वास दीखता है, लेकिन दलित महिलाये अह्सासे
कमतरी का शिकार होती हैं !आज भी जब बारिश नहीं होती तो दलित को ही दोषी ठहराया
जाता हैं !


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