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Showing posts from 2018

आप सभी महत्वपूर्ण हैं !

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इंसान जिस प्रकार भौतिक सुख सुबिदाओ को अपने लिए महत्वपूर्ण मानता है उसी    प्रकार व्यक्ति के जीवन मै महत्वपूर्ण होने की भी प्रवल आकांक्षा होती है | आप क्या चाहते है ? वैसे तो आप बहुत कुछ चाहते होंगे लेकिन कुछ चीजे ऐसी    होती है जिन्हें पाने की आपको प्रवल आकांक्षा होगी | कुछ ऐसी ही आकांक्षाओ की    सूची नीचे दी गई है जिन्हें पाने की आकांक्षा हर किसी को होती हैं |               1.      स्वाश्थ्य और जीवन का संरक्षण        2.      अच्छा भोजन        3.      अच्छी नींद        4.      परलोक सुधारना        5.      बच्चो का कल्याण        6.      पैसा और पैसे से खरीदी गई चीजें           7.      सेक्स की संतुष्टि        8. ...

कैसा भ्रम है

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कैसा भ्रम है अविरल कम है हर पल क्षण सब कुछ बदला है मेरा मन तो नहीं मानता प्यार का रंग नहीं बदला हैं !! कितने धोखे छल प्रपंच है मक्कारों से भरे मंच है झूठो की झूंठी दुनिया में झूठे ही बन गए पंच है झूठ कहेंगे झूठ सहेंगे झूठ की खातिर झूठ लिखेंगे झूठ – नगर के कोलाहल में झूठो का परचम बदला हैं ! चलो झूठ ही लिख देता हूँ प्यार का रंग नहीं बदला हैं !!

मुस्कराहट का मूल्य

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मुस्कराहट का मूल्य A beautiful Smile Change In your Life. आपकी मुस्कराहट   आपकी सदभावना की संदेशवाहक है | आपकी मुस्कराहट उन सभी लोगों की जिंदगियों को रोशन करती है जो इसे देखते हैं | उन सभी व्यक्ति के लिए जिन सभी लोगों ने दर्जनों लोगों को नाक – भौं सिकोड़ते, झुंझलाते हुए देखा हो, आपकी मुस्कराहट बादलों से झांकते हुए सूर्य की तरह होती है | खास तोर पर तब जब कोई अपने बॉस, ग्राहकों,टीचर,माता – पिता या बच्चों के कारण दबाव या तनाव में हो ऐसे समय में आपकी मुस्कराहट उन्हें बता सकती है कि निराशा से समस्याए हल नही होतीं | मुस्कराहट बताती है कि दुनिया अब भी खुशगवार और रंगीन है | इसमें कुछ खर्च नही होता, पर इसमें मिलता बहुत है | जिन्हें यह मिलता है वे सम्रद्ध हो जाते हें, परंतु जो देते हैं वे गरीव नहीं होते | यह एक पल में हो जाता है और इसकी याददाश्त कई बार हमेशा कायम रहती है | कोई भी इतना अमीर नहीँ,की इसके बिना जी सके और कोई इतना गरीब नहीं की इसका लाभ न उठा सके | यह घर में सुख लती है, बिजनेस में सद्भावना भारती है और यह दोस्ती का हस्ताक्षर है | यह थके हुओं के लिए आराम है, निर...

फ़ादर फोरगेट्स (हर पिता यह याद रखे)

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सुनो बेटे ! मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ | तुम गहरी नींद में सो रहे हो | तुम्हारा नन्हा सा हाथ तुम्हारे नाजुक गाल के नीचे दबा है | और तुम्हारे पसीना-पसीना ललाट पर घुँघराले बल बिखरे हुए हैं | मैं तुम्हारे कमरे में चुपके से दाखिल हुआ हूँ, अकेला | अभी कुछ मिनट पहले जब मैं लायब्रेरी में अख़बार पढ़ रहा था, तो मुझे बहुत पश्चाताप हुआ | इसीलिए तो आधी रात को मैं तुम्हारे पास खड़ा हूँ, किसी अपराधी की तरह | जिन बातों के बारे में मैं सोच रहा था, व ये हैं, बेटे | मैं आज तुम पर बहुत नाराज हुआ | जब तुम स्कूल जाने के लिए तैयार हो रहे थे, तब मैंने तुम्हें ख़ूब डांटा...तुमने टॉवेल के बजाय परदे से हाथ पोंछ लिए थे | तुम्हारे जूते गंदे थे, इस बात पर भी मैंने तुम्हें कोसा | तुमने फर्श पर इधर – उधर चीजें फेंक राखी थीं.. इस पर मैंने तुम्हें भला – बुरा कहा | नाश्ता करते वक्त भी मैं तुम्हारी एक के बाद एक गलतियों निकालता रहा | तुमने डाइनिंग टेबल पर खाना बिखरा दिया था | खाते समय तुम्हारे मुंह से चपड – चपड की आवाज़ आ रही थी | मेज पर तुमने कोहनियाँ भी टिका रखी थीं | तुमने ब्रेड पर बहुत सारा...

और हम बिक जाते हैं !

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हम और हमारा समाज आज दुखी है क्योकि आज हमारे चारो और हो रहे अपराध एवं बेकसूरों पर बढ़ रहे अत्याचारों के बीच आज हम अपने आप को पूरी तरह असुरक्षित महशूस करते है और इसका जिम्मा हम उन व्यक्तियों पर डालते है जिन्होंने उस घटना या बारदात को अंजाम दिया है ! लेकिन यह पूरा सच नही है क्योंकि अगर हम अपराधी को अपराध करते हुए देख भी लेते है तो हम उसका विरोध नही करते उल्टा वहा से बच निकलते या अनदेखा करते है अगर अपराधी ने हमको कुछ रुपयों का लालच क्या दिया, “ और हम बिक जाते हैं ” और हमें लगता है हमनें खुद को सुरक्षित कर लिया तो हमारा यह मानना बिलकुल गलत है ! क्योंकि भगवान न करे कि कल हमारे साथ भी बही हो या उससे बुरा जिसे कल हमने उस निर्दोष के साथ होते तो देखा पर उसकी मदद नहीँ की उल्टा चंद रुपयों के लिए इंसानियत को बेच दिया तो हमारे बुरे समय मे कौन भला हमारी मदत करने आयेगा, “ कोई नहीं ” क्योंकि हमने कल जिस निर्दोष को अपराधियों के बीच मरने के लिए अकेला छोड़ दिया था सच कहूं तो वह निर्दोष और कोई नही हम थे, “ हाँ आपने बिल्कुल सही पढ़ा है ” वह निर्दोष हम ही थे ! ऐसे कई उदाहरण हमारे चारो और मिल जायेंगे जब ...

ऐसा क्यों होता हैं ?

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सवाई माधोपुर की पूनम वर्मा वो लम्हा कभी नहीं भूल सकती जब शादी के बाद अपने ससुराल इतवा के खातोली पहुची और तथा कथित ऊची जात वालों के कुएं से पानी का मटका भरने के कारण पूनम वर्मा का मटका फोड़ दिया गया ! उन्हें पहली बार लगा जिस देश के संविधान में सभी को एक सामान अधिकार प्राप्त है वहीं एक तरफ तरल पानी को भी ऊच-नीच की दीवार से बांटा जा रहा है ! वे कहती है कि भारत में दलित उसमें भी महिला होने के मायने क्या हैं ! दलित जाति के लोगों की मानें तो सामाजिक भेदभाव तो दलित का शमशान तक पीछा करते हैं ! आज अन्य जातियों की महिलाओं में एक आत्मविश्वास दीखता है, लेकिन दलित महिलाये अह्सासे कमतरी का शिकार होती हैं !आज भी जब बारिश नहीं होती तो दलित को ही दोषी ठहराया जाता हैं !

भारत में समानता का अधिकार

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हमें बचपन से ही भारत के संविधान के बारे में पढ़ाया एवं समझाया जाता रहा हैं ! भारत के संविधान के निर्माता हम सब को समान अधिकार प्रदान कराने वाले हमारे पूजनीय डॉ. बाबा साहेव  भीमराव  अम्बेडकर जी है ! बाबा साहेब द्वारा लिखित संविधान का पालन हमारे देश की सरकार ही नहीं बल्कि कई अन्य देशो की सरकारे भी भारत के संविधान को एक मजबूत संविधान मानती है ! बाबा साहेब द्वारा निर्मित संबिधान में समानता के अधिकार पर पूरी शक्ति से बल दिया गया है और जन सामान्य को अनुच्छेद 14 से 18 के द्वारा ये अवगत कराया गया है कि भारत के किसी भी राज्य के किसी भी शहर या गाँव के किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता व कानून के संरक्षण से वंचित नही रखा जायेगा ! राज्य, धर्म, वंश, जाति, लिंग तथा जन्म स्थान के आधार पर किसी प्रकार का भेद भाव नही किया जा सकता और न ही किसी प्रकार का छुआ छूट किया जायेगा और सभी नागरिको को योग्यता अनुसार सरकारी नोकरिया प्रदान करायी जाने का प्रावधान हैं !  

मेरा परिचय

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मेरा  नाम धन सिंह माहौर है ! मैं चम्वल संभाग के डाकुओ और लुटेरो का जिला कहे जाने वाले जिला भिण्ड के सोंधा गाँव का एक अनुसूचित जाति, कोरी समाज से हूँ ! मेरे पिता श्री राम शंकर माहौर व माता श्री मति राजा बेटी माहौर का मैं तीसरे नम्बर का बेटा हूँ ! मेरे पिता बहुत गरीब परिवार से थे फिर भी मेरे पिता ने मुझे गरीबी का अहसास कभी नही होने दिया इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेरे पिता ने मुझे आज पढ़ा लिखा कर एक काबिल और समझदार इन्सान बनाया हैं ! मेरे पिताजी हमेशा कहते है कि बढ़ो का आदर करो और छोटो से प्यार , अगर हो सके तो गरीबो की मदद करो चाहे बो पेसो से हो या आपके द्वारा किये गए अच्छे कामो से और सबसे अच्छी मदद तो हम किसी को ज्ञान बांटकर और अच्छाई से रूबरू करा कर कर सकते है ! तो दोस्तों पिताजी और माताजी के आशीर्वाद से मैं धन सिंह माहौर आपको कुछ सच्ची और अच्छी कहानियो और घटनाओ से रूबरू कराऊंगा जिनको जानना हमारे लिए जरुरी और फायेदेमंद होगा !                                  ...