और हम बिक जाते हैं !
हम और हमारा समाज आज दुखी
है क्योकि आज हमारे चारो और हो रहे अपराध एवं बेकसूरों पर बढ़ रहे अत्याचारों के
बीच आज हम अपने आप को पूरी तरह असुरक्षित महशूस करते है और इसका जिम्मा हम उन
व्यक्तियों पर डालते है जिन्होंने उस घटना या बारदात को अंजाम दिया है !
लेकिन यह पूरा
सच नही है क्योंकि अगर हम अपराधी को अपराध करते हुए देख भी लेते है तो हम उसका
विरोध नही करते उल्टा वहा से बच निकलते या अनदेखा करते है अगर अपराधी ने हमको कुछ
रुपयों का लालच क्या दिया, “ और हम बिक जाते हैं ” और हमें लगता है
हमनें खुद को सुरक्षित कर लिया तो हमारा यह मानना बिलकुल गलत है !
क्योंकि भगवान न
करे कि कल हमारे साथ भी बही हो या उससे बुरा जिसे कल हमने उस निर्दोष के साथ होते
तो देखा पर उसकी मदद नहीँ की उल्टा चंद रुपयों के लिए इंसानियत को बेच दिया तो हमारे
बुरे समय मे कौन भला हमारी मदत करने आयेगा, “ कोई नहीं ” क्योंकि हमने कल
जिस निर्दोष को अपराधियों के बीच मरने के लिए अकेला छोड़ दिया था सच कहूं तो वह
निर्दोष और कोई नही हम थे, “ हाँ आपने बिल्कुल सही पढ़ा है ” वह निर्दोष हम ही थे !
ऐसे कई उदाहरण हमारे चारो
और मिल जायेंगे जब हम किसी अपराध को देख कर भी अनदेखा कर देते है और फिर बही हमारे
साथ होता है ! फिर हम कहते है इतने लोग थे
वहा पर कोई नही आया मदद के लिए दोस्तों अगर हमें खुद को और अपने परिवार जनों को
सुरक्षित रखना है|
तो अपने आप को बदलना होगा और हो रहे अत्याचारों का मिलकर सामना
करना होगा लालच देने बालों और अपराध करने वालों को मुंह तोड़ जवाव देना होगा !
हम बदलेंगे तभी समाज
बदलेगा और हम खुद को और अपने परिवार जनों को सुरक्षित रख पायेंगे !
आशा करता हूँ कि आप सभी
को मेरा यह मेसेज पसंद आया होगा और आप इस मेसेज का अपने जीवन पूरी तरह पालन
करेंगें और एक अच्छे इंसान होने का परिचय देंगे !

yes,
ReplyDeletesuch a nice words