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Showing posts from March, 2018

कैसा भ्रम है

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कैसा भ्रम है अविरल कम है हर पल क्षण सब कुछ बदला है मेरा मन तो नहीं मानता प्यार का रंग नहीं बदला हैं !! कितने धोखे छल प्रपंच है मक्कारों से भरे मंच है झूठो की झूंठी दुनिया में झूठे ही बन गए पंच है झूठ कहेंगे झूठ सहेंगे झूठ की खातिर झूठ लिखेंगे झूठ – नगर के कोलाहल में झूठो का परचम बदला हैं ! चलो झूठ ही लिख देता हूँ प्यार का रंग नहीं बदला हैं !!

मुस्कराहट का मूल्य

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मुस्कराहट का मूल्य A beautiful Smile Change In your Life. आपकी मुस्कराहट   आपकी सदभावना की संदेशवाहक है | आपकी मुस्कराहट उन सभी लोगों की जिंदगियों को रोशन करती है जो इसे देखते हैं | उन सभी व्यक्ति के लिए जिन सभी लोगों ने दर्जनों लोगों को नाक – भौं सिकोड़ते, झुंझलाते हुए देखा हो, आपकी मुस्कराहट बादलों से झांकते हुए सूर्य की तरह होती है | खास तोर पर तब जब कोई अपने बॉस, ग्राहकों,टीचर,माता – पिता या बच्चों के कारण दबाव या तनाव में हो ऐसे समय में आपकी मुस्कराहट उन्हें बता सकती है कि निराशा से समस्याए हल नही होतीं | मुस्कराहट बताती है कि दुनिया अब भी खुशगवार और रंगीन है | इसमें कुछ खर्च नही होता, पर इसमें मिलता बहुत है | जिन्हें यह मिलता है वे सम्रद्ध हो जाते हें, परंतु जो देते हैं वे गरीव नहीं होते | यह एक पल में हो जाता है और इसकी याददाश्त कई बार हमेशा कायम रहती है | कोई भी इतना अमीर नहीँ,की इसके बिना जी सके और कोई इतना गरीब नहीं की इसका लाभ न उठा सके | यह घर में सुख लती है, बिजनेस में सद्भावना भारती है और यह दोस्ती का हस्ताक्षर है | यह थके हुओं के लिए आराम है, निर...

फ़ादर फोरगेट्स (हर पिता यह याद रखे)

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सुनो बेटे ! मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ | तुम गहरी नींद में सो रहे हो | तुम्हारा नन्हा सा हाथ तुम्हारे नाजुक गाल के नीचे दबा है | और तुम्हारे पसीना-पसीना ललाट पर घुँघराले बल बिखरे हुए हैं | मैं तुम्हारे कमरे में चुपके से दाखिल हुआ हूँ, अकेला | अभी कुछ मिनट पहले जब मैं लायब्रेरी में अख़बार पढ़ रहा था, तो मुझे बहुत पश्चाताप हुआ | इसीलिए तो आधी रात को मैं तुम्हारे पास खड़ा हूँ, किसी अपराधी की तरह | जिन बातों के बारे में मैं सोच रहा था, व ये हैं, बेटे | मैं आज तुम पर बहुत नाराज हुआ | जब तुम स्कूल जाने के लिए तैयार हो रहे थे, तब मैंने तुम्हें ख़ूब डांटा...तुमने टॉवेल के बजाय परदे से हाथ पोंछ लिए थे | तुम्हारे जूते गंदे थे, इस बात पर भी मैंने तुम्हें कोसा | तुमने फर्श पर इधर – उधर चीजें फेंक राखी थीं.. इस पर मैंने तुम्हें भला – बुरा कहा | नाश्ता करते वक्त भी मैं तुम्हारी एक के बाद एक गलतियों निकालता रहा | तुमने डाइनिंग टेबल पर खाना बिखरा दिया था | खाते समय तुम्हारे मुंह से चपड – चपड की आवाज़ आ रही थी | मेज पर तुमने कोहनियाँ भी टिका रखी थीं | तुमने ब्रेड पर बहुत सारा...